कविता – एक सपना, एक ज़िंदगी
फिर एक दिन हम भी बड़े हो गए, इतने बड़े कि,माँ की गोद में सिर रखकर रो लेने को तरसने लगे,पिता की उंगली पकड़कर सड़क पार करना,अब बस एक अधूरा सपना बनकर रह गया,जिस स्कूल को कभी अपना दूसर...
Search fresh public links, source activity, and post angles for कविता.
Fresh curated links around कविता are collected here so marketers can spot useful updates and turn timely ideas into posts faster.
Recent items include:
Recent curated links from global sources. Generate one free draft from any story, then use SocialBu to schedule and refine your content calendar.
फिर एक दिन हम भी बड़े हो गए, इतने बड़े कि,माँ की गोद में सिर रखकर रो लेने को तरसने लगे,पिता की उंगली पकड़कर सड़क पार करना,अब बस एक अधूरा सपना बनकर रह गया,जिस स्कूल को कभी अपना दूसर...
रात फेरि विस्तारै पृथ्वीमाथि ओर्लिरहेको छ। आकाशले आफ्नो नीलो उज्यालो समेटेर कालो रेशमी च्यादर ओढिसकेको छ। शहरका भीडहरू निदाइसके, गल्लीहरू सुनसान छन्, झ्याल बाहिर बगिरहेको हावाले पन...
मेरे सपनों ने उड़ान भरनी शुरू की,जब से मैं दिशा सभा से जुड़ी,पहले सपने बिखरे-बिखरे थे,उनका नहीं था कोई ठिकाना,इधर-उधर भटकती सोच में,बस सपनों की बातें ही हुआ करती थीं,लेकिन दिशा सभा...
पूँजीवाद घन्काइरहेको समाजको नेपथ्यमा दुई दशकपछि कुनै आमा–छोरीको भेट भयो। काठमाडौंको सुदूर सीमामा छोरीको कोठा छ र छ एउटा पुरानो दराज, थोत्रो–मोथ्रो कपडाको एक थान भीडमा लुकेको छ उसको...
पूँजीवाद घन्काइरहेको समाजको नेपथ्यमा दुई दशकपछि कुनै आमा–छोरीको भेट भयो। काठमाडौंको सुदूर सीमामा छोरीको कोठा छ र छ एउटा पुरानो दराज, थोत्रो–मोथ्रो कपडाको एक थान भीडमा लुकेको छ उसको...
सम्भाव्य पर्यावरणीय अन्धकारमा अन्धकारकै गीत गाइरहेका अविनाश यो वाङ्मय क्षेत्रमा एक्लो यात्री थिए । आज आएर उनले हिँडेको गोरेटो महामार्ग हुने क्रममा छ ।
बनना है मुझे भी एक पुलिस ऑफिसर,यही मेरा सपना है, अपना सा प्यारा सा,एक दिन पुलिस की वर्दी पहनकर,मैं भी समाज में बदलाव लाऊँगी,लड़कियों के सपनों को नई उड़ान दिलाऊँगी,और तोड़ दूँगी उन...
Hello Everyone, I wrote this poem on my last Birthday. Unfortunately my mother was not with me on my Birthday because of her sudden demise. This poem is dedicated to my mother. ❤️ ...
आदरणीय "YOUTH KI AWAAZ” मंच को प्रणाम !स्वरचित मौलिक कविता सादर समर्पित !सार: यह एक आशावादी, प्रेरक आह्वान-गीत है। कवि नारे की भाषा में पूरी दुनिया को जोड़कर, युद्ध छोड़ विकास, पर्...
Continue reading on Medium »
गाजीपुर। साहित्य चेतना समाज के तत्वावधान में ‘चेतना-प्रवाह’ कार्यक्रम के अन्तर्गत अन्तरराष्ट्रीय चाय दिवस के अवसर पर संस्था के संस्थापक अमरनाथ तिवारी अमर के स्वामी विवेकानन्द काॅलो...
धनकुटामा आयोजित ‘चियासँग कविता’ कन्सर्टले साहित्य र संगीतलाई एउटै मञ्चमा जोड्दै दर्शकलाई भावनात्मक यात्रा गरायो ।
हवाएं भी रुख बदल लेती हैं आपको छूकर, हम क्यों ना फिसले आपकी अदाओं पे, आपकी रईस का कहना, फकीर बना देती है निगाहों से
Maa..sirf Ek shabd nhi balki hai ek ehsaasJo har khushi aur mushkil me aata h yaadJisne hme chlna sikhayaJisne hme ache bure ka ehsaas karayaJiske god me sir rkhte pareshaaniyan h...
आदरणीय “YOUTH KI AWAAZ ” मंच को प्रणाम के साथ स्वरचित मौलिक कविता सादर समर्पित !मूल भाव / केंद्रीय विचारकविता सोशल मीडिया के युग में मानवीय व्यवहार की दोहरी मानसिकता पर चोट करती है...
A world without colours would resemble a forgotten canvas — abandoned beneath endless strokes of black, white, and weary shades of grey. It would seem as though the vibrant soul of...
A poem about both independence and romance
Behind cinematic mask, Meena Kumari emerges as a haunted poet; Tanha Chand traces solitude, longing, and resilience
Use SocialBu to discover ideas, generate post drafts, and schedule them across your social channels.